Category: Essay

COVID-19 (Coronavirus) Essay in English
COVID-19 (Coronavirus) Essay in English

A virus corona or COVID-19 which has a bad effect on India, Italy, France, Iran, America, Spain, China, and many more countries. This virus has come from Wuhan in China and has destroyed all the countries, this virus has caused many deaths and some people have Hospitalized this virus is mostly found in old-aged people who are suffering from diabetes, asthma.

We have to take precautions for COVID-19:-

1) By washing your hands.
2) By using sanitizer(alcohol-based).
3) By not touching your face.
4) By using a mask when you are having a cold, cough.

Symptoms of COVID-19 (Coronavirus) are:-
Fever, cough, cold, Drownisness, Body pain, Respiratory problems.

Please be safe and stay home. We have to fight from coronavirus.

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Importance of morning walk
Importance of morning walk

Importance of morning walk

Mind resides in a healthy body“. We all agree that in today’s fast life it is essential to keep ourselves fit and active. Therefore we must set up a proper routine to complete our daily work so that we have some time for ourselves too. A morning walk is a good way to start with our routine as the atmosphere is silent and clean. There is cool breeze blowing and it feels refreshing. Morning walk tones our muscles and improves our blood circulation. Our body becomes energetic and we remain fit and healthy.

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Good eating habits
Good eating habits

Good eating habits

We should develop good habits while eating food. We should never eat our food before washing our hands with soap. We should pray to God before and after having food. We should be careful while eating that we don’t spoil our dress. We should chew our food properly. We should always use spoon and fork while eating. We should cover our dress with a napkin. We must not waste food because there are millions of people who do not get sufficient food. After having food we should keep our plates in their right place and clean the table.

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होली पर निबन्ध हिंदी में प्रस्तावना सहित
होली पर निबन्ध हिंदी में प्रस्तावना सहित

होली

प्रस्तावना

होली हमारे देश का प्राचीन पर है। इसमें नाच- गाना के साथ रंगों की भरमार होती है। इसको रंगोत्सव भी कहा जाता है। या नए वर्ष के आगमन की सूचना देने वाला त्यौहार है। फाल्गुन का महीना बीतते-बीतते जाड़े का अंत हो जाता है। बसंत की शोभा अपने उत्कर्ष पर होती है। खेतों में फसलें अपने सुनहरे रंग में कृषकों के मन में उत्साह भर देती है। ऐसे आनंदमई वातावरण में होली का पर्व मनाया जाता है।

समय

होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह मौसम बड़ा सुहावना होता है। मनोरम वातावरण में सभी लोग उमंग और मस्ती के साथ इस पर्व को मनाते हैं। इस समय तक ऋतुराज बसंत का आगमन हो जाता है। चारों और खेतों मैं सरसों के पीले फूल दिखाई पड़ते हैं। प्रकृति का रंगीन वातावरण नई उमंगे लेकर आता है। भारतीयों ने इस रंगीन मौसम में होली का त्यौहार मनाना आरंभ किया। इसीलिए इसे ‘रंगोत्सव’ भी कहा जाता है।

मनाने का कारण

भारतीय त्योहारों को मनाने के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है। लोक में प्रचलित है कि राजा हिरण्यकश्यप बड़ा प्रतापी राजा था, किंतु उतना ही अहंकारी भी। वह भगवान का सदैव विरोध करता था। स्वयं को ईश्वर से बड़ा मानता था। वह चाहता था कि प्रजा उसकी पूजा करे। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान का भक्त था। प्रह्लाद को बाल्यकाल मैं सच – झूठ की पहचान हो गई थी। प्रह्लाद ने कहा था – “भगवान से बढ़कर कोई दूसरा नहीं हो सकता। माता-पिता आदर के पात्र हैं परंतु भक्ति केवल भगवान की ही हो सकती है।”

इससे राजा हिरण्यकश्यप अपने पुत्र से नाराज हो गए। उन्हें पुत्र के उपदेश अच्छे नहीं लगे। वे प्रह्लाद को मारने का प्रयास करने लगे। अनेक बार असफल हो जाने के कारण उन्होंने अपनी बहन होलिका से सहायता करने को कहा। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी । होलिका अपने इस वरदान के घमंड में प्रहलाद को गोद में लेकर जलती लकड़ियों के ढेर पर बैठ गई। किंतु आग से प्रह्लाद कुशलता पूर्वक बाहर आ गए । होली का उसी आग में भस्म हो गई। इस प्रकार असत्य और अन्याय पर सत्य एवं भक्ति की विजय के उपलक्ष्य में हर वर्ष होली का पर्व मनाया जाता है।

होलिका पर जिस कारण भी प्रारंभ हुआ हो, इसमें संदेह नहीं कि वह हमारा प्राचीन पर्व है। अनेक पुराणों एवं साहित्य ग्रंथों में इसके मनाए जाने का वर्णन मिलता है। इस त्यौहार की सबसे बड़ी विशेषता इससे जुड़ा राग – रंग है। यह संपूर्ण जनता का त्यौहार है। इसमें धर्म , पूजा-अर्चना और विधि-विधान का उतना महत्व नहीं है, जितना महत्व गाने बजाने एवं अबीर- गुलाल उड़ाने, खाने-पीने का और हर एक के साथ गले मिलने का है।वास्तव में होली हमारे देश का राष्ट्रीय पर्व है

मनाने की विधि

इस पर्व का आरंभ होली के पाँच-छ्ह दिन पूर्व होली एकादशी से होता है।बच्चे इस दिन से एक-दूसरे पर रंग डालना आरंभ कर देते हैं। पूर्णिमा के दिन खुले मैदान में ईंधन व उपलों का ढेर लगाया जाता है। स्त्रियां दोपहर के समय इसका पूजन करती हैं। दिन में पकवान आदि बनाए जाते हैं। रात्रि को एक निश्चित समय पर इस में आग लगाई जाती है। इसमें सभी लोग गेहूं,जौ, चना आदि की अधपकी वाले भूनते हैं, फिर एक दूसरे से गले मिलते हैं।

होली के दूसरे दिन प्रातः काल लोग अबीर गुलाल एवं रंगों से होली खेलना प्रारंभ कर देते हैं। बच्चे पिचकारी से रंग सकते हैं तथा गुलाल लगाते हैं। गले मिलते हैं एवं अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। लोग टोलियां बनाकर नाचते गाते हैं एवं मौज-मस्ती करते हैं। दोपहर बाद सब लोग स्नान कर वस्त्र धारण करते हैं। एक-दूसरे से मिलने के लिए निकल पड़ते हैं। वास्तव में होली का पर्व प्रसन्नता से मनाया जाता है।

उपसंहार

वास्तव में होली का पर्व रंगों का पर्व है। यह त्योहार प्रसन्नता एवं उमंग उत्साह उल्लास एवं सद्भावना से का पर्व है। सभी लोग गले मिलते हैं। एकता और भाईचारे को बढ़ाने वाला त्यौहार है। मनुष्यों के प्रेम और प्यार का प्रतीक है यह पर्व।

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Say no to plastic – Short essay in English
Say no to plastic – Short essay in English

Say no to plastic

Science has helped humanity to progress a lot. We can see several inventions of science around. Our life has become easy and comfortable because of these inventions. But as we know, there are two sides to a coin. Besides these beneficial discoveries, science has also given us some hazards which have become a big problem for us. One such discovery is plastic. It has become almost impossible to get rid of this problem. Plastic is getting choked in lanes, eaten by the animals it is even polluting the water bodies. One single plastic product takes almost thousands years to get disposed. It is becoming a serious hazard to life on the planet. So we should ban the use of plastic at all levels and use cloth and jute bags items which can be disposed of and recycle easily.

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A bad day at school – Short English Essay
A bad day at school – Short English Essay

A bad day at school

I was very happy and excited on Saturday morning. It was an activity day in our school and our class has ‘best out of waste’ activity. My mum prepared a mini bag of all the required materials while I got ready for school. I was lost in thinking about the group we will be in, the article I was about to make a pen stand. Our day started at school as usual and finally the activity period also started. Everyone took out the material but I ransacked the whole bag but my mini bag was not inside. I was almost in tears. My partner offered me his material and we discussed over the matter. All of a sudden, our teacher noticed us talking and started scolding. When we tried to explain, she expelled us from the the classroom. To our bad luck principal sir was on round and he came to us. He too scolded us for our carelessness and our participation in the activity was cancelled. It was a very bad day I ever experienced at school.

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Essay on Rainy Day
Essay on Rainy Day

A Rainy Day

It was a fine Sunday morning I was still in bed at 9 o’clock I suddenly could hear some clattering over the shade of our garage I was over- enjoyed I knew it was raining I had planned to leave the bed late but this sudden joy couldn’t retain me on the bed anymore. I jumped out of the bed and ran to the window. Heavy showers made the roads with everywhere and it became hazy all over all the excitement drove my mind crazy and I started making paper boats with my mother’s permission I went out in the parking area and soaked myself in rain also sailed my paper boats small water puddles there. It was indeed a very joyful rainy Sunday for me after 3 hours of good rain, the sun showed brightly and I sat down to pen down my experience in my diary.

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विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व पर निबंध
विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व पर निबंध

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व

जग की सुंदरता वृक्षों एवं वनों से नहीं वरन् उसके नागरिकों से बढ़ती है‘ जा पंक्तियां पूर्णतः सत्य है। अनुशासित नागरिक ही संसार का पालन कर सकता है। आज का विद्यार्थी ही कल का नागरिक है।

“विद्यार्थी जिनमें हो अनुशासन, नागरिक बन संभाले प्रशासन”

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है। विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के साथ विद्यालय को भी नियमित रखता है। विद्यार्थी को अपने पढ़ाई की सामग्री के साथ नियमित, विद्यालय में पहुंचना चाहिए। वहां पूरी श्रद्धा के साथ अध्ययन करना चाहिए। अध्यापक गण जो पढ़ावें उसे ध्यान से सुनना चाहिए। अध्यापक की आज्ञा का पालन करना ही विद्यार्थी का कर्तव्य बनता है।

अनुशासित विद्यार्थी कर्म करे नियम बद्ध नम्र रहे अध्ययन करें क्रम बद्ध

आधुनिक युग में विद्यार्थी अनुशासित नहीं हैं। देश की रक्षा के लिए जिन मूल्यों एवं गुणों की आवश्यकता है उनका विद्यार्थी विनाश कर रहे हैं। विद्यार्थी के अनुशासित रहने के लिए केवल विद्यालय अधिकारी ही नहीं वरन पूरा राष्ट्र चिंतित है। अध्यापक अध्यापक गण अपना सतत प्रयत्न कर विद्यार्थी को अनुशासित बनाकर उन्नति प्राप्त करवाना चाहते हैं।

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My Pet Rabbit
My Pet Rabbit

I have a pet rabbit. Its name is Bunnie. It is brown in colour and white patches on one eye and both the ears. It is soft and furry. It likes to eat carrots. It keeps running around in the garden. Whenever it sees me, it runs between my legs and pimps around me. We have made a small burrow for it in the garden.
I love Bunnie very much.

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मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबन्ध
मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबन्ध

मेरे जीवन का लक्ष्य

प्रस्तावना

प्रत्येक व्यक्ति की कोई आकांक्षा होती है। होश संभालने के साथ वह कुछ बनने की बात सोचने लगता है, उसकी आंखों में कुछ सपने पलने लगते हैं , जिन को साकार करने के लिए व कठोर परिश्रम करता है।

साधनों की पहचान-व्यक्ति अपने जीवन का लक्ष्य अपनी शारीरिक,बौद्धिक और मानसिक योग्यता और रुझान केअनुरोध करता है और यह आवश्यक भी है। इस दिशा में मुझे बच्चन जी की कविता की पंक्तियां याद आती है-

पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले। कौन कहता है कि सपनों को ना आने दे ह्रदय में, देखते सब हैं इन्हें अपने समय में ,अपनी उम्र में। स्वप्न पर ही मुग्ध मत हो सत्य का भी ज्ञान कर ले।

और इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने एक पुलिस अधिकारी बनने का निश्चय किया है।

पुलिस अधिकारी के रूप में मेरा स्वप्न-

मैं एक पुलिस अधिकारी बनकर अपने समाज के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं। मैं इस समाज को भय मुक्त कराना चाहती हूं। भारत की पुलिस सेना का नाम सुनते ही अपराधियों के रोंगठे खड़े हो जाएं। यदि सभी परिस्थितियां मेरा साथ देती हैं और मैं एक बड़ी पुलिस अधिकारी बनती हूं तो हमारे देश को मैं फिर से सोने की चिड़िया में बदल दूंगी जहां शत्रु हमारे देश की ओर आंख उठाकर भी ना देख पाएंगे। मैं सोचती हूं कि अपनी मातृभूमि के प्रति देश प्रेम की भावना रखने वालों का लक्ष महान होता है।

जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं। वह हृदय नहीं पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। “

उपसंहार

मैं एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने देश के लिए जो कुछ संभव हुआ, वह करने को तैयार हूं। इसी बात पर मुझे कवि श्री माखनलाल चतुर्वेदी की कविता ‘फूल की अभिलाषा’ की याद आ गई जिसमें एक फूल कहता है-

हे माली! मुझे तोड़कर उस मार्ग पर फेंक देना जिस राह से मातृभूमि पर शीश चढ़ाने वाले उनके वीर जा रहे हों।

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